Sunday, April 12, 2009

मुँह की बात सुने हर कोई -'Jagjit Singh' Neem ka ped

राही मासूम रज़ा का उपन्यास ’नीम का पेड़’ जब दूरदर्शन पर दिखाया जाता था तो ये गज़ल जगजीत सिंह की आवाज मे बहुत अच्छी लगती थी।

आवाजों के बाज़ारों मे खामोशी पहचाने कौन?

2 comments:

संगीता पुरी said...

सचमुच अच्‍छी लगी ...

RC Mishra said...

धन्यवाद संगीता जी!