Friday, August 01, 2008

Dear Amit Sagar, Why Don't You Understand? ई-मेल

फ़कत इक मौज के प्यासे Amit K. Sagar भाई साहब,
आप ऐसा क्यों कर रहे हो?
और इतने लोगों मे से कोई कुछ नही कह रहा।
इतने सारे ई मेल पते अपने ब्लॉग http://hindi.rcmishra.net पर छापना अच्छी बात नही है। फ़िर भी 2-3 घंटे तो ये पोस्ट ऐसे ही रहने वाली है।
वैसे भी किसी को क्या फ़रक पड़ता है।

Update 1: पब्लिक ओपिनियन को देखते हुए सारे ई मेल पते समय से पहले हटाये जा रहे हैं।

धन्यवाद।

Update 2:
From: Amit K. Sagar [mailto:ocean4love@gmail.com]
Sent: 01 August 2008 11:56
To: mahen; mishra; aroonarora
Subject: Re: Dear Amit Sagar, Why Don't You Understand?

नमस्कार,
आपका संदेसा प्राप्त हुआ.
अतः हम कहना चाहेंगे कि भविष्य में आप लोगों को मेरी तरफ़ से व् "उल्टा तीर" की तरफ़ से किसी भी तरह की गतिविधि की बाबत कोई भी कभी भी मेल नहीं किया जायेगा. आज तक लिए क्षमा चाहते हैं.
---शुर्किया---


From: Amit K. Sagar [mailto:ocean4love@gmail.com]
Sent: 01 August 2008 10:20
To: s
Subject: जल्द आ रही है

जल्द आ रही है

जल्द आ रही है "उल्टा तीर" की ओर से "जश्ने-आज़ादी-०८" की पत्रिका; दिल खोलकर शिरकत कीजिये...आप अपने विचार ३ अगस्त की दोपहर (१२ बजे तक) हमें मेल कर सकते हैं.

Blog:

E-mail:
ultateer@gmail.com
help.ultateer@gmail.com

---
amit k. sagar
ocean4love@gmail.com
# +91 97180 08643

--
With; Thanks & regards
उल्टा तीर (तीर वही जो घायल कर दे...)


"सामाजिक बहस वक़त की ज़रूरत है।सार्थकता के लिए ज़रूरी है; लोगों की जादा सहभागिता हो।ताकि हम बिन्दु के हर पहलु पर विचार-विमर्श करे सकें।कोई भी पक्ष, कोई भी अपनी बात कहने से महरूम न रहें। सके इक नया निर्माण, बेहतर समाज।(अगर समाज में बुराइयां पल रही हैं तो हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है, बुराइयों के कारणों को जान सकें, हल तलाश तलाशें...बेहतर समाज का निर्माण करने में अपना योगदान देन..." AKSagar

"कविता आंदोलन की प्रेरणा बन सकती है।पर्चा क्रांति के लिए चिनगारी बन सकता है। असहयोग लोगों को जगा सकता है, हमें सोचने के लिए उकसा सकता है।जब हम एक-दूसरे के साथ संगठित हो जाते हैं, साथ बोलने के लिए तैयार हो जाते हैं, तब हम ऐसी ताकत पैदा कर सकते हैं जिसे कोई सरकार दबा नहीं सकती।"

AMIT K. SAGAR
+91 97180 08643
फ़कत इक़ मौज का प्यासा ~! ~सागर~! ~

13 comments:

रचना said...

maene inko mail dae kar manaa kiyaa tha jwab mila tha
" aap jitna soch sakte haen mae ussey jyaad baant chuka hun ""

Amit K. Sagar said...

नमस्कार,
आपका संदेसा प्राप्त हुआ.
अतः हम कहना चाहेंगे कि भविष्य में आप लोगों को मेरी तरफ़ से व् "उल्टा तीर" की तरफ़ से किसी भी तरह की गतिविधि की बाबत कोई भी कभी भी मेल के नहीं किया जायेगा. आज तक लिए क्षमा चाहते हैं.
---
वाबजूद इसके, पूछना चाहूंगा, इस तरह से अपने ब्लॉग में मेल id व् संदेश छापने का क्या तर्क है? आप मेरी बात भली-भाँती समझ रहे होंगे. उम्मीद है...इसे मानवता से लिया जाए...u rachnaa! मैंने आको पहले भी बोला था, अगर मेरी ओर से कोई भी संदेश आपको प्राप्त हुआ है तो मुझे forward करें, चूँकि आपकी तो मेल id ही मेरी लिस्ट में नहीं.
---शुर्किया---

Gyandutt Pandey said...

हमने तो छूटते ही स्पैम में डाल दिया था।
आपने तो दर्द को उभार कर दवा की! :-)

Amit K. Sagar said...

आपने लिखा:
फ़कत इक मौज के प्यासे Amit K. Sagar भाई साहब,
आप ऐसा क्यों कर रहे हो?
और इतने लोगों मे से कोई कुछ नही कह रहा।
---
मैं कहता हूँ:
चूँकि वो समाज के जिम्मेदार लोग हैं.
---
मैं जो कर रहा हूँ, वो अपराध नहीं!

mahashakti said...

किसी अन्‍जान के ईमेल पते को प्रर्दशित करना स्‍वयं में अपराध एवं अनैतिक है, आपका मेल मुझे प्राप्‍त हुआ इस कारण इस ब्‍लाग पर आना हुआ। भइया आप ईमेल को प्रदशित किया इससे स्‍पैमरों को ही बढ़ावा मिलेगा।

आपसे अनुरोध है कि जल्‍द से जल्‍द ईमेल पतों को हटा दीजिए। जहॉं तक बात किसी के कुछ न कहने की है कि जिसके लिये यह समस्‍या है, वह अपने तरीके से इससे निपट रहा है, श्री ज्ञानदत्‍त जी की तरह, आशा है कि आप मेरे बात पर गौर करेगें और 48 घन्‍टें का इंतजार नही करेगें।

Amit K. Sagar said...

मेरा अन्तिम संदेश इस ब्लॉग के लिए: मैं मानता हूँ कि जिसको भी अपने मेल पते की privacy की बहुत चिंता है, उसे चाहिए कि वो जाल के किसी भी कोने में अपने मेल पते को सार्वजनिक न करे. उसके लिए कभी समस्या पैदा ही नहीं होगी. आपकी व्यस्तता टाटा-बिरला सी रहे...पड़ोस में धमाके होते रहें...आप सुकून से सोते रहें...एसी मैं कामना करके यहाँ से विदा चाहता हूँ, इक अगले कदम की और बदने हेतु...देखिये आगे होता है क्या-क्या!
---
दिन शुभ हो.
शुक्रिया

masijeevi said...

ये अमित भाई तो किसी क्रांति उरूंति के लिण्‍ निकले हैं तो उनका लोगों की प्राइवेसी की चिंता न करना समझ में आता है पर मिश्राजी आप काहे इतनर नासमझी दिखा रहे हैं जो इतने सारे पते आपने पोस्टिया दिए ? पोस्‍ट रखिए इशारा कीजिए पर ईमेल पते हटा दीजिए.. हमारी सलाह तो ये ही है, बाकी आप तय करें।

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

मिश्रा जी सबसे पहले तो धन्यवाद आपने इस और ध्यान इंगित करवाया सबका. परंतु पोस्ट में से मेल हटा देते आप तो बढ़िया रहता..

दूसरी बात अमित जी को दोषी ठहराना भी ठीक नही.. हमारे पास दिन भर में कई स्पैम मेल्स आती है लेकिन उसे लेकर कोई पोस्ट लिखना ठीक नही है.. जिस किसी का ई मेल अड्रेस लीक हुआ है ये उसकी ज़िम्मेदारी है..

यदि किसी को बुरा लगता है तो वो पर्सनली मेल भेज दे, जैसा रचना जी ने किया.. परंतु इस तरह ब्लॉग पर सार्वजनिक करना ठीक नही..

मैने केवल अपने विचार रखे है आशा है आप इसे अन्यथा नही लेंगे..

Amit K. Sagar said...

बेहतर और भी है कि जिन पतों के लिए (यानी जिस ब्लॉग के लिए-जिस गतिविधि के लिए) ये इक आम संदेश जिस तरह से इक प्रकरण बना दिया गया...उसका नाम http://ultateer.blogspot.com
http://ut-con.blogspot.com
भी अपडेट कर दीजिये. साथ मैंने अब तक जो इस विषय पर यहाँ बोला; वो भी यहाँ रख दीजिये. शुक्रिया.

RC Mishra said...

रचना जी मैने भी पहले कई बार ई मेल किया था। कोई उत्तर नही मिला था।

पाण्डेय जी आप बहुत तेज़ हैं। :)

प्रमेन्द्र आपने जैसा कहा हमने वैसा किया

मसिजीवी जी, आपकी आज्ञा शिरोधार्य।

कुश, आपको ई मेल भी किया है, बाकी आपने बिल्कुल सही बात कही है, अन्यथा लेने वाली कोई बात ही नही है।

Raviratlami said...

"...और इतने लोगों मे से कोई कुछ नही कह रहा।..."

क्या बात करते हैं. अवांछित मेल पहली दफ़ा में ही स्पैम टैग हो जाता है, और दोबारा वो इनबक्सा में आता ही नहीं. ये सस्ता, सुंदर और सरल उपाय है. यकीन नहीं तो हमें अवांछित मेल भेज देखिए, हम आपको भी कुछ नहीं कहेंगे, हमारा वादा है. :)

Rachna Singh said...

how ignorant this person is about email shows from the very fact that on the mail that i recieved i replied and told him to use BCC and he repeatedly asking me to forward the mail to him !!!!!!
not only this he is saying that since he has segregated male female ids there should be no problem . since i use mail down load in outlook express and also for official purposes such mails which comet omy spam box are also downloaded in outlook express because many times a new business contact may not be always in safelist .
AND THE WORST REPURCUSSION IS when somene clicks reply to all
ravi ji any solution for poor souls like us

RC Mishra said...

Rachna Ji,

In outlook you can create a specified rule, which would automatically detect these kind of e-mails and won't show you any more.

I would be mailing you the details, on how to do it.

In the mean time I suggest you to use Office Outlook or Thunder Bird, instead of outlook express !