Sunday, July 01, 2007

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक ४१। निष्काम कर्म फल

Chapter 2: Verse 41

Subject: Desire less Action Affects

व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन।
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्॥२-४१॥

O Kurunandana (son of Kuru dynasty), those who proceed on this path of Nishkam Karma Yoga, have resolute determination (single-pointed conviction or steady intellect), while the mind of those unwise remains fragmented in endless irresolute thoughts whose actions are guided by desires (motives).


Lesson: Desire less action promotes steady intellect and firm determination.

हे अर्जुन! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुध्दि एक ही होती है, किन्तु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुध्दियां निश्चय ही बहुत भेदों वाली और अनन्त होती हैं। ॥४१॥

शिक्षा: 'निष्काम कर्म', 'स्थिर-बुद्धि' और 'दृढ़-निश्चय' को प्रेरित करता है।

 

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक ४१। निष्काम कर्म फल

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