Thursday, June 21, 2007

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक २३-२४: आत्मा की विशेषतायें ।

Verse: 23-24

Subject: Characteristics of the Soul

विषय: आत्मा की विशेषतायें

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥२३॥

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥२४॥

Neither the weapons can cleave it (the soul), nor can fire burn; water can not drench it, nor can air dry.

This (soul) can not be broken or burnt or dried-up. Soluble indeed, it is everlasting, all pervading, and immovable, stable and primeval.

इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकती।

क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और नि:संदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहने वाला और सनातन है।

श्रीमद्भगवद्गीता । Shrimadbhagvadgita: अध्याय २: श्लोक २३-२४ । आत्मा की विशेषतायें

2 comments:

Udan Tashtari said...

जय हो!!

Shrish said...

गीता के सर्वश्रेष्ठ उपदेशों में से एक, आत्मा अजर है अमर है।

Immortal!