Sunday, December 11, 2005

सारे जहाँ से अच्छा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुले हैं इसकी, वो गुलसितां हमारा


पर्वत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का

वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा, सारे...


गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां

गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा

सारे....


मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा, सारे...

जैसा कि आप को पता होगा यह गीत सुप्रसिद्ध कवि

मुहम्मद इकबाल ने 1904-1905 में लिखा था

इस गीत का अंग्रेजी शब्दार्थ निम्नलिखित है

Better than all the world, is our India
We are its nightingales and this is our garden

That mountain most high; neighbor to the skies
It is our sentinel; it is our protector

A thousand rivers play in its lap,
Gardens they sustain, the envy of the heavens is ours

Faith does not teach us to harbor grudges between us
We are all Indians and India is our homeland

इंटेर्नेट पर इस गीत की मीडिया फाइल की खोज करते

करते मैने एक टिप्पणी पायी जिसको मैं अवश्य

उद्ध्रित करना चाहूंगा

Bismil@Delphi comments :-
 
जनाब कहते हैं कि यह इकबाल के तराना-ए-मिल्ली से 
बहुत सफाई से चुराई गयी परोडी है
उनके अनुसार,  वास्तविक गीत है,
चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तां हमारा,
मुस्लिम हैं हम, वतन है सारा जहां हमारा
 
The real beauty of the first verse is that it turns around 
Iqbal's arguably communal and national hymn into a 
cry of of the oppressed and anguished that is neither 
communal nor chauvinist nor nationalist, but internationalist.
वे कहते हैं कि इकबाल की एक दूसरी नज्म 
तराना ए हिन्द से लिये गये खंड भी पहचाने जा
 सकते हैं विशेषतः भारतीयों के लिये, 
जो जानते हैं सारे जहां से अच्छा
 
ऎ आब ए-रुद-ए गंगा, वो दिन याद है तुझको,
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा
जिसके लिये परोडी है: सडकों पे घूमता है अब कारवां हमारा
और आखिरी पंक्ति जो बहुत से लोग नहीं जानते:
इकबाल कोई महरुम, अपना नहीं जहां में,
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा 
या फिर तराना-ए-मिल्ली  से जो इस तरह से है,
ऎ गुलिस्तां-ए-अन्दालस, वो दिन याद है तुझ को,
था तेरी डालियों में जब आशियां हमारा ?
 
Overall, it seems to him that the song takes a somewhat 
dim view of the lofty and grandiose nationalism of Iqbal 
by presenting some home-truths about real present day life. 
आपके क्या विचार हैं?

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